जिन खामोशियों से डर रहे थे . . .

जिन खामोशियों से डर रहे थे
आज उन्हीं खामोशियों के सहारे हो तुम,
जिस जगह दुबारा आना नहीं चाहते
आज वहीँ आ रुके हो तुम।

जाने यहाँ कौन सा सामान पड़ा है तुम्हारा
पुरानी चीजों का तुम्हें शौक तो नहीं
देखो, यहाँ राख बना पडा है सारा
किसी भी तस्वीर में तुम्हारा नाम ही नहीं।

“हम यादों मे जिंदगी बिता देंगे” कहकर
अपने ही अंदाज़ में जीते थे तुम
शहर को छोड़, अपनों को भुला कर
नई राह पर चल दिए तुम ।

वक्त ने ना साथ दिया तुम्हारा
यादें खीँच ले आयी दुबारा,
बिन बुलाये मेहमानों की तरह
आज फिर लौट आये हो तुम।

जिन खामोशियों से डर रहे थे
आज उन्हीं खामोशियों के सहारे हो तुम,
जिस जगह दुबारा आना नहीं चाहते
आज वहीँ आ रुके हो तुम।

Image courtesy: InternetMonk

उड़ रहे हैं हम जाने किस ओर. . .

Kite

एक कटी पतंग की जैसी डोर
उड़ रहे हैं हम जाने किस ओर
कभी ऊँचे पेड़ो से तकराकर लहराते
तो कभी हवा के तेज़ झोकों से आज़ाद हो जाते

हैं सफ़र यह निरंथर, न रुखेगी कभी
जो मिली कुशी, तो लगे जिंदगी
और कही मिले निराशी, तो लगे बंदगी
लो बन के अरमान, हम उड़ चले

चार अक्षर ही लिखे ते नए पन्ने पर
फिर आया बुलावा – एक आवाज़ ऐसी
न चेहरा ता और न थी कोई दिलचस्पी
जब समज आया की बहुत देर हो चुकी

लो फिर निकल लिए हम बोरिया भांद कर
नए राहें और नए मंजिलों के खोज पर
एक कटी पतंग की जैसी डोर
उड़ रहे हैं हम जाने किस ओर…

फिर कर शुरुवात …

नन्हे क़दमों से शुरू किये
जो सफ़र कोमल हाथों के सहारे
लो आज मांगे साथ दुबारा
तुम नहीं तो जग बेगाना

फिर आ कड़ी हूँ मैं चौराहे पर
किस राह पर मंजिल लिखी हैं ?
काले बादलो से लगता हैं दर
तुम्हारे आँचल में समेट, होना हैं बेफिकर

याद हैं मुझे वो एक रूपये का सिक्का
रोज जमा कर मुझे अमीर बना देना
कब बन गयी तीन रूपये का जुगाड़
कर दिया हर नसीयत तेरी बिगाड़

लो कहो ‘ फिर कर शुरुवात…’
ख्वाब शीशों का नहीं, यकीन दिला दो
तुम्हारी छोटी छोटी बातों में छिपा हैं खज़ाना

लो आज मांगे साथ दुबारा
तुम नहीं  तो जग बेगाना …

Pic courtesy : http://tweetymom.files.wordpress.com